this is my second attempt... i have been inactive for last year bt this time i'll try to be regular....
क्या हूँ मैं....एक खोज
क्या हूँ मैं और क्या नही, अब बस इन्ही सवालों में उलझा हूँ
क्या मैं एक ख्वाब हूँ जो टुटा हो जाने कितनी बार
या मांस हड्डी का एक पुतला मात्र, जिसमें अब कोई संवेदना न बची हो
कभी हार हूँ मैं या जीत का श्रृंगार हूँ
कभी प्यार हूँ मैं तो कभी घ्रणा का पात्र हूँ
विज्ञ हूँ या अनभिज्ञ हूँ
प्रकाश हूँ या घना अँधेरा
कोई कहता है ब्रह्मंश हूँ मैं, तो कोई पशु मानता है
कई बार सोचता हूँ
कि मैं हूँ भी!! या अपना एक संदेह मात्र हूँ
पर कुछ तो हूँ मैं,
मिट गयी जो परिस्तिथियों में दब कर बो मिटी हुई छाप हूँ मैं
एक सोच हूँ, एक विचार हूँ
जो बदलना चाहती है आज को और आज के धुंधले कल को.....
No comments:
Post a Comment