This poem is for my sister "Parul", written about one year ago....
नसीब - पगली बीती बातो को भूल जा….
पगली तू क्यों उदास है,
ये तो सब नसीब का खेल है
कोई पास तो कोई फ़ैल है।
जिन्दगी ने मुझे भी रुलाया है कई बार,
तो क्या फिर बस उदास हो जाऊ
और जिन्दगी ने दिए जो हंसीन पल, उन सब को भूल जाऊ।
माना कि आज अँधेरा घना है,
दिल उदास है , कोई न पास है
पर बीती बातो को तू भूल जा,
एक नई सुबह को तेरी ही तलाश है।
पगली तू क्यों उदास है…
चल अब दुखियारी ऒरत का चोंला छोड़,
नजर उठा कर देख,
अब भी कोई तेरे पास है, तेरे साथ है...
क्या है तेरे पास और किसकी तुझे तलाश है,
एक बार खुद को मेरी नजर से देख,
तू एक प्यारा सा एहसास है।
क्या अभी-भी पगली तू उदास है… :)
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