Wednesday, November 14, 2012

Children day special :)

                                        तलाश...मेरा बचपन                             


जाना था उसे  एक दिन और एक दिन वो मुझसे रूठ गया 
हाय, मुझसे मेरा बचपन छुट गया।

और आखिर वो रुकता भी  क्यों 
इस  मतलबी, चालाक दुनिया में  शायद उसकी कोई जगह न थी
मानो इस समाज ने उसका गला घोट दिया हो।

अब तो बस तलाश जारी है 
पुराने  बागों, खेतो और मैदानों में ढूद्ता हूँ मै उसे 
शायद किसी किनारे पर बेठा,
कुछ खुरापात करता मिल जाये कंही।




आप भी ढुढना उसे,  कुछ 3-4 फुट का होगा 
वो पागल,बेफिक्र नादान  तपते सूरज में  खेलता हुआ,
शायद मिल जाए आपको ही कही 
और शायद इसी खोज में आप खुद को- अपने बचपन को ढूंड पाये।।

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